Biography

श्रृद्धेय आचार्य विपिन कृष्ण जी महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1988 को गालव ऋषि की तपोभूमि, ग्वालियर में हुआ बचपन से श्री आचार्य जी को देखकर ऐसा लगता था कि इन पर ठाकुर जी की विशेष कृपा है आचार्य जी के बड़े दादा जी गोलोक वासी श्री कुंज बिहारी जी महाराज भागवत एवं ज्योतिष के प्रकाण्ड विद्वानों में से एक थे इन्हीं की कृपा विलासिता से कई बार आचार्य जी बचपन मैं उन्होंने अपना दर्शन करवाया एवं अपनी इस वंश परम्परा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी जो संकेत आचार्य जी को स्पप्न में होते थे उनका जिक्र आचार्य जी घर पर करते थे तो पता चलता था कि ये सब सत्य घटनायें हैं।

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समय रहते आचार्य जी के पिता जी श्री राकेश तिवारी एवं माता जी मिथलेश तिवारी जी ने इन्हें 8 वर्ष की आयु में बृज के ठाकुर श्री बांके बिहारी जी की पावन धरा पर अध्ययन के लिए भेजा जहाँ आपने अनेकोनेक विद्वानों के सानिध्य में रहकर भागवत एवं ज्योतिष का पूर्ण अध्ययन किया एवं बृज के दर विद्वान हरिदासीय सम्प्रदायाचार्य श्रृद्धेय आचार्य गोस्वामी गौरव कृष्ण जी महाराज से गुरूमंत्र दीक्षा सम्पन्न की एवं 15 वर्ष की आयु में आचार्य जी जब पुनः अपनी जन्मभूमि पर लौटे तो जन-जन में उन्होंने भागवत का प्रचार प्रसार किया वो भी पूर्णतः निशुल्क और आज बांके बिहारी की कृपा विलासिता से पंजाब, हरियाणा हिमाचल, झांसी, कानपुर, उरई एवं सम्पूर्ण भारत में भागवत जी के अनेकोनेक अनुष्ठान सम्पन्न किये साथ ही ज्योतिष के माध्यम से कई भक्तों के कष्ट भी दूर किये।

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About Samiti

।। राधा रानी धर्मार्थ एवं गौ रक्षा सेवा समिति (रजि0)।।।
दीन दुखियों एवं असहाय वृद्ध गायों के कल्याणार्थ आचार्य जी ने इस समिति का गठन किया कई ऐसे बच्चे थे जो दिव्यांग या किसी कारणवश दो वक्त का भोजन जिन्हें नसीब नहीं होता ऐसे बच्चों को जब सड़क किनारे भीख मांगते, कचरा उठाते एवं कचड़े के ढेर में अपना भोजन ढूढ़ते, जब आचार्य जी ने देखा तो उनकी इस पीड़ा को देखकर आपकी आंखे भर आई और आचार्य जी ने संकल्प किया कि मैं जो भी कमाऊँगा उससे इन बच्चों की सेवा करूँगा एवं उनके भोजन की व्यवस्था करूँगा। सम्पूर्ण भारत में जब गायों की दुर्दशा देखी तो इस समिति का ही एक अंग जो गायों की रक्षा हेतु चुना गया जितने भी शिष्य जो सम्पूर्ण भारत में आचार्य जी से यंत्र दीक्षा ले चुके है उनके द्वारा गायों की रक्षा कराने का संकल्प पूर्णता की ओर अग्रसर है। उन शिष्यों के द्वारा जो दान राशि दी जाती है उसे दीन-दुखियों, दिव्यांग बच्चों एवं गायों की रक्षा हेतु उपयोग किया जाता है जो भी भक्त इस समिति से जुड़ना चाहते है वे इस समिति में दान करके पुण्य लाभ अर्जित कर सकते है।ं

जिन भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं गायों की सेवा की एवं जितने वर्ष ठाकुर जी बृज में रहे उन्होंने अपना सर्वस्त्र गायों की सेवा में लगा दिया, क्या उन गायों के लिए अपनी कमाई का कुछ हिस्सा भी नहीं दे सकते जिस गाय को हम माँ कहते है क्या उस माँ की ये दशा आप सभी को अच्छी लगती है मैं निवेदन करूँगा अपने सभी भक्तों से कि उठो जागो और इस संकल्प की पूर्ण करने में मेरी मदद करें तन-मन-धन के साथ

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Diwali Anusthan

Date - October 14th - 19th, 2017

City Center, Gwalior

Satchandi

Date - December 25th - 31th, 2017

Shivpuri, Gwalior

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